Tuesday, 23 June 2020

मनुष्य की जीवटता की सबसे मजबूत डोर होती है आशा तो फिर डिप्रेसन में आत्महत्या क्योँ ?
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आज के समाज को सबसे पहले एक बात समझनी आवश्यक है कि मानव जीवन हमेशा से अवसादों,  कठिनाइयों भरा रहा है। यूँ तो अवसाद या डिप्रेशन कई तरह का होता है जो हर इंसान के जीवन में किसी ना किसी मोड़ पे होता ही होता है। हम किसी रिश्ते में , पढ़ाई में, नौकरी -व्यापार, प्रमोशन में जब असफल होते हैँ तो हमें उस नुकसान का बुरा लगता है, तनाव होता है, ये स्वभाविक है। लेकिन इतने भर से कोई आत्म हत्या नही करता। आत्महत्या का कारण कभी नुकसान मात्र नही होता, क्योंकि नुकसान की भरपाई हो सकती है फिर वो मानसिक हो या आर्थिक। एग्जाम अगले साल फिर होगा, प्रेम फिर घटित होगा, प्रमोशन अगले साल मार्च में फिर हो सकता है, आज घाटा तो कल मुनाफा हो सकता है। ये जीवन का हिस्सा हैँ इसके लिए कोई जीवन ख़त्म नही करता।


आत्महत्या का मूल कारण होता है "उम्मीद का ख़त्म हो जाना"। जब व्यक्ति को लगता है कि जो चीज चली गयी वो लौट कर नही आएगी। उसे यदि दुबारा मिलने की सम्भावना हो तो आदमी कभी आत्महत्या नही करता। सारे धर्म की किताबों का मूल यही होता है कि जो हो रहा है वो ईश्वर,  अल्लाह, गॉड कि मर्जी है ताकि मनुष्य सोच ले इसमें उसकी कोई गलती नही है। वो शोक मानाने की बजाय आगे बढ़ जाये। शुरुआत में हिन्दू धर्म में मृत्यु के बाद तेरहवीं (भोज) का प्रावधान इसी लिए था कि लोग शोक छोड़ कर तैयारियों में जुट जाएँ..
मनुष्य की जीवटता की सबसे मजबूत डोर होती है आशा और वो आती है छोटे-छोटे जीतने के अहसासों से। हर व्यक्ति अपनी जिंदगी के बुरे, असफल और कड़वे अनुभव याद रखता है लेकिन अच्छे अनुभव भूल जाता है। 


मेरी 2 सलाह है कि अव्वल तो आप अपनी जिंदगी की हर वो छोटी से छोटी जीत, अच्छा अहसास याद रखें जिससे आपको सुकून मिला है..  जैसे कब आप सबसे खूबसूरत दिखे, कक्षा में कब डिबेट जीती, गली क्रिकेट में हाफ सेंचुरी मारी, दोस्तों की महफिल में कैसे आपके गाने ने समां बाँध दिया..  आपकी प्रेमिका /प्रेमी से आपकी किसी अन्य ने तारीफ की,  आपके परिवार को कब आपपे फ़ख्र महसूस हुआ वगैरह...  ये छोटी बातें हैँ लेकिन यकीन मानो इंसान आत्मविश्वास एक दिन में नही बनता..  इन्हीं चीजों से धीरे-धीरे आत्मविश्वास बनता है। 

दूसरा, बुरे वक्त को हर कोई याद रखता है लेकिम आप हमेशा बहुत बुरे वक्त के तुरँत बाद का समय याद रखें... 
याद कीजिये जब आपको किसी बात के घर पे पता चलने का बहुत डर था लेकिन एक बार पता चल गयी तो घर वालों ने सम्भाल किया और आपकी छाती से एक बोझ कम हुआ। फेल होने के बाद आप जब दुबारा में  सफल हुए। इस से आपको ताकत मिलेगी। आपका दिमाग अवश्य कहेगा कि जब वो बुरा वक्त नही रहा तो ये भी नही रहेगा। इस से कभी आप हिम्मत नही हारोगे, आशा ख़त्म नही होंगी। कभी-कभी सारे लॉजिक कहेँगे कि अब कोई रास्ता नही बचा, तब पुराना बुरा वक्त याद करो तो लगता है कोई न कोई तो रास्ता निकलेगा ही। क्योंकि पहले भी ऐसा हुआ था, तब भी तो निकला था..  

ये मेरा तरीका है..  मुझे पता नही आपको अच्छा लगेगा या बकवास लेकिन अभी तक हमेशा सफल रहा है। आजमा कर देखिये और बुरे वक्त में कभी नींद ना आये तो जिंदगी का सबसे खूबसूरत गुजरा वक्त याद करना.. (ex नही ).. नींद आ जाएगी। 

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